गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर एक दूरदर्शी नेता थे। जानिये क्यों।

एक नाटककार, कवि, और चित्रकार, रविंद्रनाथ टैगोर आज तक एक घरेलू नाम हैं।उनका जन्म बुद्धिजीवियों के परिवार में हुआ था। उनके पिता, महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर, एक दार्शनिक और ब्रह्म समाज आंदोलन के एक प्रसिद्ध चेहरे थे। एक अलग युग में पैदा होने के बावजूद, टैगोर और उनके खयालात, समय से परे हैं और अभी भी प्रासंगिक हैं। उनके काम में अंग्रेजी शासन के खिलाफ विरोध, और मानवता और पर्यावरण के लिए प्रेम साफ नजर आता है। आज भी दुनिया को उनके सिद्धांतों की उतनी ही आवश्यकता है जितनी की पहले थी।

Rabindranath-Tagore

टैगोर को आश्चर्यजनक रूप से कम उम्र से ही लेखन का शौक था। महज आठ साल की उम्र में उन्होंने कविताएं लिखना शुरू कर दिया था। भविष्य में यह शौकिया क़लम क्या पैदा करेगा, इसकी कल्पना कोई नहीं कर सकता। टैगोर ने संस्कृत-उन्मुख साहित्य की परंपरा को तोड़ा और इसके बजाय अपने गद्य में देशी, अनौपचारिक भाषा का इस्तमाल किया।। यही एक कारण है